पैरालंपिक एथलीट मरियप्पन थांगावेलू और वरुण भाटी. Reuters
रियो में मेडल जीतते देखने की बड़ी ख्वाहिश थी. जब सिन्धु और साक्षी मालिक ने मेडल जीता तो बस पूछिए मत क्या ख़ुशी मिली. मगर रात जब आप सो रहे थे तो उससे भी बड़ी ख़ुशी देश की झोली में आ गई. अरे साब जी आप सोते ही रह गए और इंडिया ने रियो में गोल्ड जीत लिया और ब्रॉन्ज भी जीता है. हमें इन खिलाड़ियों पर गर्व है. इनको हमारा सलाम.
पैरालंपिक एथलीट मरियप्पन थांगावेलू. Reuters
रियो पैरालंपिक के पोडियम पर इस बार इंडियंस थे. ये ख्वाब पूरा करने वाले हैं पैरालंपिक एथलीट मरियप्पन थांगावेलू. इन्होंने इत्ती ऊंची छलांग लगायी कि गोल्ड पर कब्जा जमा लिया. ऊंची कूद में मरियप्पन थांगावेलू इतिहास रचा तो वहीं, वरुण भाटी ने भी इस ही कॉम्पीटिशन में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर दोहरी खुशी का छोंका लगा दिया. सिल्वर मेडल अमेरिका के सैम ग्रेवी को मिला. और भाई साहब एक मेडल भाला फेंकने वाले कॉम्पीटिशन में आते-आते रह गया. संदीप भाला फेंकने में चौथे नंबर पर रह गए.
पैरालंपिक एथलीट मरियप्पन थांगावेलू और वरुण भाटी. Reuters
पैरालिंपिक खेलों में भारत के मरियप्पन थंगावेलु ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया और वरुण सिंह भाटी ने हाई जंप टी-42 में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया.
थांगावेलू ने हाई जंप टी-42 में गोल्ड के लिए 1.89 मीटर की छलांग लगाई. और भाटी ने 1.86 मीटर की. वहीं शुरुआत में पहले स्थान पर रहे भारत के शरद कुमार अंत में छठे पायदान पर खिसक गए.
द हिंदू को मार्च में दिए गए इंटरव्यू में 20 साल के थांगावेलू ने कहा था, रियो में मेडल जीतना उनके लिए मुश्किल नहीं है. और गोल्ड जीतना भी पॉसिबल है.’
थांगावेलू जब पांच साल के थे तो वो अपने गांव पेरियावादागाम्पत्ति में स्कूल जा रहे थे, जो तमिलनाडु में सलेम से 50 किलोमीटर दूर है. तब एक बस से एक्सीडेंट हो गया. उनका राइट पैर बस के नीचे आने से कुचल गया और उनकी टांग ख़राब हो गई. जो सही नहीं हुई. वहीं वरुण भाटी की टांगे पोलियों की वजह से ठीक से विकास नहीं कर पायीं.
रियो पैरालंपिक में तमिलनाडु एथलीट मरियप्पन थांगावेलू ने गोल्ड जीता. Reuters.
18 सितंबर तक चलने वाले पैरालंपिक खेलों में दो रिफ्यूजी समेत 4,344 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं. जबकि 154 देशों में लाइव ब्रॉडकास्ट हो रहा है. पैरालिंपिक्स की शुरुआत 1948 में हुई थी. इसकी सबसे कामयाब प्लेयर त्रिशा ज़ोर्न हैं, उन्होंने कुल 55 मेडल जीते, जिनमें 41 गोल्ड मेडल शामिल हैं. खेल मिनिस्ट्री ने पहले घोषणा कर दी थी कि पैरालिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को 75 लाख रुपये, सिल्वर मेडलिस्ट को 50 लाख रुपये और ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले खिलाड़ी को 30 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा.
थांगावेलू पैरालंपिक खेलों में मुरलीकांत पेटकर (स्वीमिंग 1972 हेजवर्ग) और देवेंद्र झाझरिया (भाला फेंक, एथेंस 2004 ) के बाद गोल्ड जीतने वाले तीसरे इंडियन हैं. थांगावेलू और भाटी की इस सफलता के बाद अभी तक के सभी पैरालंपिक खेलों में इंडिया के कुल 10 मेडल हो गए हैं. जिनमें 3 गोल्ड, तीन सिल्वर और चार ब्रॉन्ज शामिल हैं.
No comments:
Post a Comment