रजत ‘सतारा’ के लिए.
कहते हैं पहले प्यार जैसा कोई प्यार नहीं होता. बेशक, नहीं होता. पहले प्यार के वक्त आप इतने बेवकूफ जो होते हैं. कुछ यूं होता है कि जो मिला, उसे मुंह से लगा लिया. महसूस होता है कि ‘मुच्चू-मुच्चू-नोनू-मोनू वाली गल्लां’ में जीवन कट जाएगा. साथ बूढ़े होंगे. फिर एक दिन उसका फेसबुक खुला छूट जाता है और आपको महसूस होता है कि ये तो कहीं और भी सेट है. दिल टूटता है. लड़कों की कलाइयां टूटती हैं जो उन्होंने किसी चीज पर दे मारी होती हैं. लड़कियों का मेकअप छूट जाता है. आंखें सूज जाती हैं. माथे पर साफ़ शब्दों में छप जाता है ‘आगे रास्ता बंद है, यहां दिल की मरम्मत चल रही है’.
दिल टूटना. कितना दर्दनाक फ्रेज है. ‘ब्रेकअप’ से कहीं ज्यादा दर्दनाक. और मैं बिलकुल भी दर्द के पक्ष में नहीं हूं. हल्के से सर दर्द में भी डिस्प्रिन गटकने वाली. लेकन दिल टूटने के पक्ष में हूं. आज और हमेशा. दो-तीन बार टूटे तो बेहतर होगा. लेकिन एक बार भी टूटे तो चलेगा.
दिल टूटने पर दुख होता है. और ये कोई हल्की बात नहीं. लोग जहर खाते हैं, छतों से कूद जाते हैं, फांसी लगा लेते हैं. जानें जाती हैं. किसी से दूर होना किसी इंसान के लिए इतनी भारी बात होती है कि वो ये तक नहीं सोचता कि मेरे सुसाइड करने के बाद मेरे घरवालों और उन तमाम दोस्तों का क्या होगा जिनके लिए वो ख़ास थे. और सबसे बड़ी बात, उस इंसान का क्या होगा, जिससे तुमने ब्रेकअप किया था. वो तो खुद को तुम्हारी मौत का जम्मेदार मानकर जाने कितने मेंटल ट्रॉमा से गुजरेगा. कुछ सुसाइड से नीच वाले लेवल पर रहते हैं. हाथ तोड़ते हैं, बेहोश होते हैं, अस्पताल में भर्ती होते हैं. और कुछ अकेले में रो-रोकर गहरे अवसाद का शिकार हो जाते हैं. क्लिनिकल डिप्रेशन, जिसे जाने में महीनों का वक्त लगता है. जो ब्रेकअप से गुजरे हैं, वो जानते हैं कि ये मात्र ‘एक पार्टनर गया, दूसरा आया’ वाली बात नहीं होती. हो सकता है आप सैकड़ों बार प्रेम करें. और हर व्यक्ति के जाने पर उतना ही दुख हो.
फिर मैं इस दुख के पक्ष में क्यों हूं?
कहते है जबतक पांवों में प्लास्टर न चढ़े, साइकल चलानी नहीं आती. प्रेम का लॉजिक मुझे वैसा ही लगता है. हमारा प्रेमी हमें पूरा करता है. बुरे समय में हिम्मत बांधता है. लेकन वही प्रेम अगर अझेल होने लगे, तो आप पर जोंक कि तरह चिपक जाता है. अंदर-अंदर ही आपका खून चूसता है और आपको मालूम भी नहीं पड़ता. अपने दिन-रात किसी के नाम कर देना बेशक एक अच्छी फीलिंग होती है. लेकिन जब आपके दिन-रात उस व्यक्ति के चंगुल से मुक्त होते हैं, तब आपको पता पड़ता है कि ये भी एक किस्म कि आजादी है.
ये आजादी आपको जीना सिखाती है. हां, आपको अकेलापन महसूस होता है. लेकिन ये अकेलापन आपको अपने आप से परिचित कराता है. अपने कमरे की सीली दीवारों पर लटके जिस आईने में कल तक आप किसी और कि शक्ल देख रहे होते हैं, आज आप उसमें अपनी शक्ल देखते हैं. अपने नैन-नक्श देखते हैं, अपनी आंखों के नीचे पड़े काले घेरों को देखते हैं. अपनी उंगलियां देखते हैं जो अब किसी और की गर्दन पर नहीं फिरतीं. अपने झुके हुए कंधे देखते हैं. जब सारे कपड़े उतार आप नहाने घुसते हैं तो महसूस करते हैं कि जिस्म आपका है. आप कभी खुद के इतने करीब नहीं होते जितना ब्रेकअप के बाद होते हैं.
सुबहें बोझल होती हैं. बिस्तर नहीं छूटता. पर मैं इस फीलिंग के बारे में बात नहीं कर रही हूं. बात कर रही हूं उस फीलिंग की जब आप एक गहरी सांस लेते हैं और खुद से कहते हैं कि उठो, कॉलेज/ऑफिस जाना है. आज गैस सिलेंडर भरवाना है. फिर बिजली का बिल जमा करना है. कजिन की शादी की शॉपिंग करनी है. एक पुराने दोस्त से मिलना है. और आप उठ खड़े होते हैं. फिर उस आईने में अपनी शक्ल देखते हैं जिसमें सिर्फ आपका प्रतिबिंब दिखता है. सिर्फ आपका. आप शॉवर लेते हैं. शरीर की हरारत मिट जाती है. फिर आप निकल पड़ते हैं दिन से लोहा लेने, अकेले.
आपको लगा था कि आपसे फिर कभी प्रेम न होगा. पर दोस्त, दिल पर न, एक कोटिंग होती है असली, मजबूत कनपुरिया चमड़े की. आपको लगता है कि वो बहुत कमजोर है. पर असल में होता नहीं. ढीठ होता है. फिर से प्रेम कर बैठता है. और पहले प्यार सी फीलिंग्स फिर से वापस आ जाती हैं. लेकिन इस बार आप समझदार हो चुके होते हैं. देख-परखकर, ठोंक-पीटकर प्रेम करते हैं. डोलों के साइज, परफ्यूम की खुशबू, या आंखों के काजल से प्रेम नहीं करते. जिस्मों, शक्लों से प्रेम नहीं करते. बातों से प्रेम नहीं करते. आप एक इंसान से प्रेम करते हैं. उसके दिमाग, उसकी सोच से प्रेम करते हैं. तब आप मुस्कुराकर शुक्रिया अदा करते हैं उसका जो आपको छोड़कर गया.
इसलिए जो छोड़कर जाता है, उसके पीछे न भागो. वो तुम्हारे बुलाने से रुक भी गया, तो भी ये याद रखना, कि अपनी मर्ज़ी से नहीं रुका.
जानते हो, हमारी दिक्कत क्या है? हमसे रिजेक्शन झेला नहीं जाता. ‘उसने मुझसे ना कैसे कहा?’ टाइप का ईगो. अरे भाई उसका मन नहीं लग रहा था, वो चला गया. बिना मन के वो तुम्हारे साथ भी रहता तो तुम क्या उखाड़ लेते. इस बात का शुक्र मनाओ कि वो खुद ही चला गया. वरना एक दिन तुम उसका खुला हुआ फेसबुक देखते तो कितना दुख होता, नहीं?
बेवफाई कुछ नहीं होती, मेरे दोस्त. बॉलीवुड के लिरिक्स भरने के लिए एक शब्द भर है. अपने हिस्से का प्रेम करने और पाने का हक़ सबको है. अगर उसे किसी और से प्यार हो जाए तो तुम कुछ नहीं कर पाओगे. तुम्हें किसी और से प्यार हो जाए तो वो कुछ नहीं कर पाएगा. भले ही कितना भी समय साथ बिता लो. भले ही एक दूसरे को सारे पासवर्ड बता दो.
और हां, दिल टूटने के बाद जब दोबारा प्रेम करो, तो दूसरे व्यक्ति पर अविश्वास रखने के बजाय खुद पर विश्वास रखो. कि तुम एक मजबूत इंसान हो. और ब्रेकअप होना दुनिया की सबसे नॉर्मल चीज है. कभी कहीं तुम्हारा एक्स टकरा जाए तो मुस्कुरा कर कहना, ‘शुक्रिया दिल तोड़ने के लिए.’ क्योंकि दिल टूटना भी जरूरी है.
जाते जाते एक गाना सुन जाओ. जॉन लेनन का नाम सुना है? ‘द बीटल्स’ वाले? उनका उनकी पत्नी सिंथिया से तलाक हो गया था. जापानी सिंगर योको ओनो से अफेयर के चलते. दोनों का कॉमन फ्रेंड था, पॉल मेकर्टनी. सिंथिया ब्रेकअप से दुखी थीं. तब ये गाना पॉल ने सिंथिया और जॉन लेनन के बेटे के लिए लिखा था. लेकिन सिंथिया और जॉन को भी ये गाना खूब पसंद था. सिर्फ उन्हें ही नहीं, पूरी दुनिया को.


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