Monday, 12 September 2016

ये है राक्षसों के नामकरण की कहानी

ये है राक्षसों के नामकरण की कहानी


कई शरीर यूज करते हुए भगवान ब्रह्मा ने सुबह, शाम, दिन, रात, असुर, देवताओं को रचा. फिर ब्रह्मा ने नारी रूप धरा, जिसके लिए ब्रह्मा ने शरीर धारण किया रजोमात्रात्मक. जिससे ब्रह्माजी को भूख और काम को पैदा करने में हेल्प मिली. अंधेरे में खड़े होकर ब्रह्माजी ने फटाफट भूख से बिल्लाती एक सृष्टि को प्रोड्यूस कर डाला. इस सृष्टि से बड़े कुरूप और दाढ़ी- मूंछवाले व्यक्ति उत्पन्न हुए.
ये सारी दाढ़ी वाले लोग पैदा होते ही ‘जॉम्बी’ की तरह ब्रह्माजी को खाने के लिए दौड़ पड़े. पर इनमें से कुछ निकले भले मानुस. भगवान ब्रह्मा को खाने निकले लोगों में से जिन्होंने कहा, ‘ऐसा मत करो, इनकी रक्षा करो.’ वे कहलाए राक्षस. और जिन्होंने कहा, ‘हटो बे, हम तो खाएंगे.’ वे खाने की वासना वाले होने से ‘यक्ष’ कहे गए. ये सब नजारा देखकर ब्रह्माजी के बाल सिर से गिर गए. बाल गिरने के बाद ब्रह्माजी के दुनिया बवंडर रचने का मामला थमा नहीं, आगे क्या हुआ ये बताएंगे अगली किस्त में.

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